कम्प्यूटर
भारत के प्राचीन खगोलशास्त्री और गणितज्ञ आर्यभट्ट ने दशमलव प्रणाली
(Decimal System) का अविष्कार किया था। यह 0 से 9 तक की संख्या थी। इन दो अंकों (0 और 1) का
प्रयोग पहले कम्प्यूटर की संरचना के लिए इस्तेमाल किया गया था। आज भी कम्प्यूटर
इसी सिद्धान्त पर काम करता है। अगर आर्यभट्ट दशमलव प्रणाली का विकास न करते तो
शायद कम्प्यूटर का अविष्कार न हो पाता।
कम्प्यूटर का
अविष्कार मूल रूप से गणितीय गणनाओं के लिए किया गया था। फ्रांसीसी गणितज्ञ ब्लेज पास्कल ने 1642 में
कैलकुलेटर का अविष्कार किया। यह संख्याओं को जोड़ और घटा सकती थी। सन 1834 में चार्ल्स बैबेज ने
पास्कल से प्रेरणा लेकर पहले कम्प्यूटर का अविष्कार किया। चार्ल्स बैबेज ब्रिटिश गणितज्ञ थे जिन्हें
कम्प्यूटर का पिता माना जाता है। यह प्राचीन तरह का कम्प्यूटर था। आधुनिक
कम्प्यूटर 1944 से बनने शुरू हुए।
पहले
कम्प्यूटर बहुत बड़े होते थे। एक कमरे के बराबर का एक कम्प्यूटर हुआ करता था। उसको
चलाने के लिए बहुत बिजली खर्च होती थी। धीरे-धीरे कम्प्यूटर छोटे होने लगे और आज
हम डेस्कटॉप से लैपटॉप और लैपटॉप से मोबाइल पर शिफ्ट हो गए हैं। आज पूरी दुनिया के
लिए कम्प्यूटर एक आवश्यक उपकरण बन गया है। आज कम्प्यूटर तकनीक का प्रयोग लगभग हर
जगह हो रहा है। सोचिए! आज अगर कम्प्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल न होता तो आज की दुनिया
कैसी होती?
आज
कम्प्यूटर ने पूरी दुनिया को बदलकर रख दिया है। कलाकार, चित्रकार, विद्यार्थी,
डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक सभी कम्प्यूटर का प्रयोग कर रहे हैं। रेल, वायुयान,
बैंक, डाकघर, सरकारी कार्यालय सब कुछ आज कम्प्यूटर के माध्यम से ही चल रहे हैं।
कम्प्यूटर की मदद से फिल्में बनाना, देखना और फोटोग्राफी करना बहुत आसान हो गया
है। खगोल विज्ञान और ज्योतिष में कम्प्यूटर का खूब इस्तेमाल हो रहा है। आज
कम्प्यूटर आपका मनोरंजन करने के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधानों में भी सहायता कर
रहा है। आज कम्प्यूटर का महत्व बहुत बढ गया है। इसलिए कम्प्यूटर न जानने वाले
व्यक्ति को निरक्षर और पिछड़ा हुआ माना जाता है।
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